"गुप्तरत्न " "भावनाओं के समंदर मैं "
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Guptratn "Bhawnaon ke samndar mein" :a page of hindi poetry/shayri
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है
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#main sochti hi rahti hun #block rakhte hai #likh to tum bhi sakte ho... #TUMHARA PARYAYWACHI NAHI MILA #mere gale nhi utrta #guptratn_shayri
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मत पूछों मुझे क्या क्या रोकता है , #guptratn kya kya rokta hai
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sharab kya hoti hai ,kitne rang aate jaate hai
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reel viral ho gaye, ek muddat lagi tere dil tak
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#guptratn फिर आशिक़ सुबह और शाम नहीं देखते,
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