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गुप्त रत्न "भावनायों के समन्दर मैं" लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"गुप्त रत्न" हिन्दू,मुस्लिम,सिख इसाई सब इसकी शान है,

गुप्त रत्न -हिंदी कवितायेँ, : कागज़ पर स्याही विखेरना क्या होता है,बताती हूँ की ...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : पलकों मैं बैठा लिया आपको दिल से मजबूर होकर ,बेईज्ज...

"गुप्त रत्न " "तेरे सीने से लिपटने का मन है करता, बोलूं कैसे?

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "अजीब सी कशमक...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : शराब जैसे लगने लगे हो मुझको,कडवे हो,मेरे जैसे लगन...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : "गुप्त रत्न " "बदले है ढंग आजकल ""गुप्त रत्न "" भ...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : "गुप्त रत्न ""ख़ामोशी की गहराई मैं"सामने बैठकर दि...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : सिमट जाऊं ,तेरी बाहों मैं,इस इम्तिहा तक तरसाना चा...

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं " लहरों के श...

#गुप्तरत्न लहरों के शोर से समन्दर की गहराई का अंदाजा नही होता,

लिखी हुयी इबारत हूँ ,चंद पढ़ डालिए जनाब //

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : वाह  क्या चीज़ है ..........कौन कहता है, शराब बुर...

कौन कहता है शराब..................

"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं : बता भी दो क्यों रहते हो मुझसे नाराज़,याद दिलाती हू...