यह ब्लॉग खोजें
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
संदेश
"गुप्तरत्न" "भावनायों के समन्दर मैं" लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
#गुप्तरत्न :तुझ पर असर करे मेरी तड़प में वो आह नहीं ,
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
#गुप्तरत्न कैसे लिखे सरेआम ख्याल अपने .......इरादा भटकने का तेरी गलियों में और
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : क्यूं न गुरूर तेरा जल सका ,॥मेरी चाहतों में क्य...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "हलके लफ़्ज़ों ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
ग़ज़ल "गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : gupt ratn hindi kavityanतेरा कांधा , गर यूँ ही...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : अचानक पन्ने पलटे ,की कुछ ख्याल आ गयाकितने आगे आ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
ग़ज़ल "गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

