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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न" "भावनायों के समन्दर मैं " लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
#गुप्तरत्न : अज़ब किरदार था उसका भी किताब मैं ,आखिरी पन्ने तक उस...
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आपके लिए आते है अल्फ़ाज़ तुमको देखकर "रत्न"
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गुप्तरत्न : बिखरी ज़ुल्फे,गोरे गाल, और वो उसकी आँखे,उफ्फ कयामत...
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