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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न" "भावनायों के समन्दर मैं" लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
खुल कर लिख तो दूँ ,तेरा नाम हर नज़्म में,
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#कोरोना सा है ,मौत ही इसका अंजाम होता है भाई
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guptratn shayri गुप्तरत्न भावनाओं के समन्दर में
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"गुप्त रत्न" दफ़न हो गई मेरी ख्वाहिशे जाने कितने ही रिवाजों मैं...
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