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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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#इस दिल-ए-बस्ती में ,मेरे और भी कर्ज़दार बैठे है , Guptratnअच्छे-अच्छे #सिकंदर यहाँ वक़्त की लिए मार बैठे है॥
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गुप्तरत्न : मुझे दोस्ती से डर लगता है,मुझे मुहब्बत से डर लगता ...
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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "हलके लफ़्ज़ों ...
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"गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं " आईने से गुफ्तगू जारी रख
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न जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll
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गुप्तरत्न ज़नाब याद रखो, उन किस्सों मैं आप ही जगह ख़ास रखते है ll,
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"गुप्तरत्न " : आप चाहो तो जीत सकते है हम, भी ये बाज़ी आपको दिल ह...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": तू ही बता खुद को समझाएं कैसे lये तड़प दिल की,तुम...
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