यह ब्लॉग खोजें
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
संदेश
"गुप्त रत्न" "भावनायों के समन्दर मै" लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
#Guptratn#हर स्टूडेंट की दर्द भरी कहानी गुप्तरत्न की जुबानी- बाल-दिवस
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
कोरोना सा है ,मौत ही इसका अंजाम होता है भाई
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
# बिजली भी छोड दे, बादल के सीने में,निशां...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
आपके लिए गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप






