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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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# : गुप्त रत्न "भावनायों के समन्दर मैं"खाक नही होना ,...
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गुप्तरत्न : #गुप्तरत्न,:अच्छे-अच्छे सिकंदर यहाँ वक़्त की लिए म...
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#इस दिल-ए-बस्ती में ,मेरे और भी कर्ज़दार बैठे है , Guptratnअच्छे-अच्छे #सिकंदर यहाँ वक़्त की लिए मार बैठे है॥
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गुप्तरत्न : क्यूं न गुरूर तेरा जल सका ,॥मेरी चाहतों में क्य...
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