संदेश

मई, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुप्तरत्न : की मेरी दिल-ए-ज़मीं को गलत इन्साफ करते नहीं आता ll

जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll...