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#गुप्तरत्न : दोस्त तुम बने नहीं, न रही कभी रंजिशे आपसी ,

देना है जो वो हर पैगाम लिखते है

#GUPTRATNगुप्तरत्न : दोस्त तुम बने नहीं, न रही कभी रंजिशे आपसी ,

गुप्तरत्न :#वक़्त देना होगा मुझे

#गुप्तरत्न : "गुप्तरत्न ""भावनाओं के समंदर मैं "...

गुप्तरत्न : मेरी पसंद लाजवाब है

ख़ामोशी की गहराई में

मेरी पसंद लाजवाब है

आपके लिए"

नहीं सीखनी ऐसी दुनियादारी

वरना मशहूर है गुरूर #गुप्तरत्न का