संदेश

#गुप्तरत्न बस दिन आज हो

#guptratn शुरुवात में ही वाकिफ थे ,की खत्म जरुर होना था ,

#गुप्तरत्न : दोस्त तुम बने नहीं, न रही कभी रंजिशे आपसी ,

देना है जो वो हर पैगाम लिखते है

#GUPTRATNगुप्तरत्न : दोस्त तुम बने नहीं, न रही कभी रंजिशे आपसी ,

गुप्तरत्न :#वक़्त देना होगा मुझे

#गुप्तरत्न : "गुप्तरत्न ""भावनाओं के समंदर मैं "...

गुप्तरत्न : मेरी पसंद लाजवाब है

ख़ामोशी की गहराई में

मेरी पसंद लाजवाब है

आपके लिए"