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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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अप्रैल, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न" हिन्दू,मुस्लिम,सिख इसाई सब इसकी शान ह...
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गुप्तरत्न : भावनायों के समन्दर मैं आपके लिए गुप्तरत्न
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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "नज़रों का ध...
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गुप्तरत्न : तुम्हारे गुरुर के आगे तो हार गए हम, तुम्हें तो सली...
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न जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll
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गुप्तरत्न : बहुत डूबी हूँ बहुत डूबीं हूँ , तुममे लफ्जों मैं इत...
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