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#Guptratn#हर स्टूडेंट की दर्द भरी कहानी गुप्तरत्न की जुबानी- बाल-दिवस

खुल कर लिख तो दूँ ,तेरा नाम हर नज़्म में,

गुप्तरत्न : यकीं क्या वक्त का,जो है आज ये पल "कल"न हो