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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "क्या बताएं ...
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गुप्तरत्न :वो तेरा ख्याल की जी न सकेगी बिन तेरे "रत्न "
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गुप्तरत्न : guptratn -मुहब्बत का किस्सा है दूर तलक जाएगा। .......
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गुप्तरत्न : बिखरी ज़ुल्फे,गोरे गाल, और वो उसकी आँखे,उफ्फ कयामत...
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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "गुप्तरत्न "भ...
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#गुप्तरत्न : मेरा दिल दुखा तो है तुम्हारी बातों से ,अश्क भी बह...
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गुप्तरत्न : खंडहर देखकर यूं ...........................
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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "ठंडी हवाएं ...
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