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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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#गुप्तरत्न कैसे लिखे सरेआम ख्याल अपने .......इरादा भटकने का तेरी गलियों में और
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गुप्तरत्न : #guptratn दूर तुझे रखती है ,वरना तू जल जाएगा ll
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# इतना रुसवा हुयें उसकी महफ़िल में ,कि डरने लगे अब ,
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इतना रुसवा हुयें उसकी महफ़िल में ,कि डरने लगे अब ,
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गुप्तरत्न : #गुप्तरत्न:बस कहने को "सच" को गीता और कुरआन में रख...
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गुप्तरत्न : #गुप्तरत्न:बस कहने को "सच" को गीता और कुरआन में रख...
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# : गुप्त रत्न "भावनायों के समन्दर मैं"खाक नही होना ,...
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गुप्तरत्न : #गुप्तरत्न,:अच्छे-अच्छे सिकंदर यहाँ वक़्त की लिए म...
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