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गुप्तरत्न : जानवर सा इंसान रखती हूँ

guptratn shayri गुप्तरत्न भावनाओं के समन्दर में

गुप्तरत्न : गुप्तरत्न : पतझड़ गवाह है,की किसी बाग में हमेशा तो ...

guptratn shayri : गुप्तरत्न -शायरी

#गुप्तरत्न -शायरी aapke liye

नया गीत खुदा की मेहरबानी

#गुप्तरत्न : पतझड़ गवाह है,की किसी बाग में हमेशा तो बहार न रही

#गुप्तरत्न बस दिन आज हो

#guptratn शुरुवात में ही वाकिफ थे ,की खत्म जरुर होना था ,

#गुप्तरत्न : दोस्त तुम बने नहीं, न रही कभी रंजिशे आपसी ,

देना है जो वो हर पैगाम लिखते है