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शिक्षा में सादगी और विश्वास -गुप्तरत्न

आपके लिए गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी...

गुप्तरत्न : इसके लिए ग्रहण की इतनी खींचातानी देखी है ।हिंदी कवितायेँ,

गुप्तरत्न : मुझे दोस्ती से डर लगता है,मुझे मुहब्बत से डर लगता ...

पर सागर की फ़ितरत कही टिकता नही था।।

अपनी कद्र खुदको बता रहे है हम