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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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taalukkaat khatam hone ki shuruaat kab ki ho chuki
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जाने क्यूँ उसको सोचकर #jaanekyunuskosochkar
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#गुप्तरत्न ये जो #कहानी है,इसको अब यूँ रहने देते है ,
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# guptratn हो गई तो हो गई ,बात होनी तो हो गई
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#वक्त लगता है सुनने और सुनाने waqt lagta hai inhe sunne aur sunaane
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