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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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# बिजली भी छोड दे, बादल के सीने में,निशां...
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#गुप्तरत्न : वाकिफ हम है इस कहानी के अंजाम से ,पर करें भी क्या?...
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गुप्तरत्न नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है .........तुफानो से घिरा समन्दर है
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शिक्षा में सादगी और विश्वास -गुप्तरत्न
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आपके लिए गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी...
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गुप्तरत्न : इसके लिए ग्रहण की इतनी खींचातानी देखी है ।हिंदी कवितायेँ,
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गुप्तरत्न : मुझे दोस्ती से डर लगता है,मुझे मुहब्बत से डर लगता ...
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