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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आपके लिए गुप्तरत्न : बहुत डूबी हूँ बहुत डूबीं हूँ , तुममे लफ्जों मैं इत...
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गुप्तरत्न : सोच लो एक बार पहले किसी को गिराने से,उसी ज़मीं ...
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गुप्तरत्न : दिल मेरा मजबूरी से नहीं मुहब्बत से दबा है ,पर इसे...
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गलतफहमियों के अँधेरे बड़े निराले है ,कितने ही उजले...
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गुप्तरत्न : गलतफहमियों के अँधेरे बड़े निराले है ,कितने ही उजले...
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आपके लिए आते है अल्फ़ाज़ तुमको देखकर "रत्न"
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