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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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गुप्तरत्न ज़नाब याद रखो, उन किस्सों मैं आप ही जगह ख़ास रखते है ll,
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"गुप्तरत्न " : दिल मैं अपने मुहब्बत और एहसास रखते है ,दिलो मैं आग...
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"गुप्तरत्न " : वाकिफ हम है इस कहानी के अंजाम से ,पर करें भी क्या?...
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"गुप्तरत्न " : poems available in audio .............�� click on ...
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"गुप्तरत्न " : तुम फिर आयें, मेरी जिंदगी मैं यूँ,जैसे दबी ह...
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"गुप्तरत्न " : लिखूं क्यां ये समझ नहीं आ रहा ,दिल मैं जो है, वो ...
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"गुप्तरत्न " : गुप्त रत्न मेरी तो जुबां काली है , हर बात सदाकत ...
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"गुप्तरत्न " : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "अब अल्फ़ाज़ न...
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"गुप्तरत्न " : आप चाहो तो जीत सकते है हम, भी ये बाज़ी आपको दिल ह...
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