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गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "हलके लफ़्ज़ों ...

"गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं " आईने से गुफ्तगू जारी रख

गुप्तरत्न : की मेरी दिल-ए-ज़मीं को गलत इन्साफ करते नहीं आता ll

जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll...

गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न" हिन्दू,मुस्लिम,सिख इसाई सब इसकी शान ह...

गुप्तरत्न : भावनायों के समन्दर मैं आपके लिए गुप्तरत्न 

गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "नज़रों का ध...

गुप्तरत्न : तुम्हारे गुरुर के आगे तो हार गए हम, तुम्हें तो सली...

अपनी गलती कौन सुने ऐसा ही ज़माना ...

न जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll

गुप्तरत्न : बहुत डूबी हूँ बहुत डूबीं हूँ , तुममे लफ्जों मैं इत...