यह ब्लॉग खोजें
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
संदेश
गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "हलके लफ़्ज़ों ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं " आईने से गुफ्तगू जारी रख
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : की मेरी दिल-ए-ज़मीं को गलत इन्साफ करते नहीं आता ll
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न" हिन्दू,मुस्लिम,सिख इसाई सब इसकी शान ह...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : भावनायों के समन्दर मैं आपके लिए गुप्तरत्न
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : "गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "नज़रों का ध...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : तुम्हारे गुरुर के आगे तो हार गए हम, तुम्हें तो सली...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
न जाने जहाँ कोई हमें,साथ तेरे ऐसी ही जगह जाना हैll
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गुप्तरत्न : बहुत डूबी हूँ बहुत डूबीं हूँ , तुममे लफ्जों मैं इत...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

