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#गुप्तरत्न : वाकिफ हम है इस कहानी के अंजाम से ,पर करें भी क्या?...

गुप्तरत्न नहीं मिटेगी मृगतृष्णा कस्तूरी मन के अन्दर है .........तुफानो से घिरा समन्दर है

डर लगता है

शिक्षा में सादगी और विश्वास -गुप्तरत्न

आपके लिए गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी...

गुप्तरत्न : इसके लिए ग्रहण की इतनी खींचातानी देखी है ।हिंदी कवितायेँ,

गुप्तरत्न : मुझे दोस्ती से डर लगता है,मुझे मुहब्बत से डर लगता ...

पर सागर की फ़ितरत कही टिकता नही था।।

अपनी कद्र खुदको बता रहे है हम