यह ब्लॉग खोजें
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
संदेश
"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": मशगला सा ,न तआरूफ कराना यारों मैं "रत्न"के नाम का,..
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": तेरे ख्याल तो नशा है, मय के लिए भी मयखाना हो गए //...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": तेरे ख्याल तो नशा है, मय के लिए भी मयखाना हो गए //...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": पतवार हाथ मैं रखकर भी बेठिकाना ही रहना है सफीने मै...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": मुकर्रर दिन बता दो, फासले और ये गिले मिटाने //न छ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न" ख़ामोशी की गहराई मैं शिकायतें, तेरी बहुत कडवी है "रत्न"मैंने नही कहा,...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न"न संभलेगा दिल तेरे सामने बैठकर ,"रत्न"...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्तरत्न " नहीं मिटेगी मृगतृष्णा,कस्तूरी मन के अन्दर है,सागर ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप