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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : गुप्त रत्न,खोमोशी की गहराई मैं अच्छा लगने लगा है...
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"गुप्त रत्न ": रोक नदियों को सकते हो,/समन्दर को किसने बाँधा है ,...
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"गुप्त रत्न ": क्या करे की अब कुछ समझ आता नहीं ,छाया है कोहरा घन...
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"गुप्त रत्न ": थोडा तो रंग आँखों मैं भरने दो,दिल जो चाहता,वो तो ...
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"गुप्त रत्न ": खोमोशी की गहराई मैं........आजकल मैं तनहा नही ,ह...
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"गुप्त रत्न ": ख़ामोशी के गहराई मैं .....गुप्त रत्न नही रहे काब...
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"गुप्त रत्न ": -------------------------------------सफ़र कैसा था,...
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"गुप्त रत्न ": सता ले,चाहे जितने लें इम्तिहान,अब आप भी ले इक बात ...
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"गुप्त रत्न ": चमक के लिए जरुरी है.....................=========...
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