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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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#गुप्तरत्न : "गुप्तरत्न" महक रहे है, तेरी खुशबू से अब तलक ,
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गुप्तरत्न : खुल कर लिख तो दूँ ,तेरा नाम हर नज़्म में,
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#Guptratn#हर स्टूडेंट की दर्द भरी कहानी गुप्तरत्न की जुबानी- बाल-दिवस
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खुल कर लिख तो दूँ ,तेरा नाम हर नज़्म में,
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गुप्तरत्न : यकीं क्या वक्त का,जो है आज ये पल "कल"न हो
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गुप्तरत्न : वक़्त देना होगा मुझे ........होश ले जाता है रत्न के...
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कोरोना सा है ,मौत ही इसका अंजाम होता है भाई
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#कोरोना सा है ,मौत ही इसका अंजाम होता है भाई
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guptratn shayri गुप्तरत्न भावनाओं के समन्दर में
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गुप्तरत्न : गुप्तरत्न : पतझड़ गवाह है,की किसी बाग में हमेशा तो ...
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