संदेश

न वो अब घर रहा, न वो रहे ठिकाने ,तुझसे मिलने के भ...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ "एक दिन कभी यूँ भी होगा ...

आपके लिए पत्थर सा दिल, ये मोम बना, पिघल रहा है कतरा-कतरा।

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सबसे मिलते - मिलते सीखा मैंने भी ,कभी खुदसे मिलना...

टूटे दिल की सी,आवाज़ लगीकोई तो  मीरा ही  कह गया ,...

हर शख्स हैरान परेशान सा है यहाँ पर ,किसको सुनाएँ ...