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गुप्तरत्न : मुझे दोस्ती से डर लगता है,मुझे मुहब्बत से डर लगता ...

पर सागर की फ़ितरत कही टिकता नही था।।

अपनी कद्र खुदको बता रहे है हम

देखे कब तलक रखते हो खुद पर इख़्तियार गुप्तरत्न

#गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी खुद पा न सक...

#गुप्तरत्न : इक बार खोना है यूँ, तुममे की खुद को भी खुद पा न सक...

#guptratn ..........देखा है आईने को मैंने मेरे दोस...

#गुप्तरत्न : होश रहता है कहाँ मुझे तेरी आगोश में ।।

#गुप्तरत्न : कहानी का अहम किरदार है ..........

मुन्तजिर है तेरी एक इजाजत के