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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : ले नहीं देते तुम पर हम इल्जाम ,मुहब्बत का गुनाह,भ...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : बेचैनिया ये हद से गुजरने लगी अब,बताती हूँ मैं क्य...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : कहा था मैंने,शब्दों मैं अपने रह जाऊंगा।पढोगे जब ज...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : खो गए सारे रास्ते,तुम तक आने के लिए,बचा भी नहीं क...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : तो मेरा नाम नहीअसर हो रहा, थोडा-थोडा दिल पर अभी...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "बिना किसी श...
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"गुप्त रत्न " भावनायों के समन्दर मैं : आप ही बता दो ,गर है कोई और तरीका इज़हार-ए -हाल का...
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