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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...

"गुप्त रत्न" मुझे उन राहों पर अब फिर ...

इतनी पिला मुझे की होश कम भी न रहे ,........

मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...