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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": इक इशारा कर दे बाहों में बिखर जाएंगे lइससे ज्यादा...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": तू ही बता खुद को समझाएं कैसे lये तड़प दिल की,तुम...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": चाहते थे बेचैनिया मिटाना हम, आपके पास आकर lपर ये...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": कैसे छुपाऊं ये झूठ कहा नही जाता lकह दूँ ज़माने स...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": सभी शिक्षकों को समर्पित एक शिक्षिका की नज़र से ...
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"गुप्तरत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": हृदय बना सारंगी जैसा,धड़कन जैसे हो इसके तार lदेखें...
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"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": "गुप्तरत्न" भावनायों के समन्दर मैं बिन गुनाहों के ...
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"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": देखते है कब तलक बचते है हुज़ूर,राहे-ए -सुखन और नि...
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"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": जगमगा रही है,अंधेरो को ,उस रौशनी को रहने दे/जिद ...
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"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": पतवार हाथ मैं रखकर भी बेठिकाना ही रहना है सफीने मै...
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"गुप्त रत्न " भावनाओं के समन्दर मैं": मशगला सा ,न तआरूफ कराना यारों मैं "रत्न"के नाम का,..
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