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"गुप्त रत्न ": तेरी बरूखी ने एहसान कर दिया,मेरा वक़्त  मेरे ही ना...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सता ले अभी,यूँ हाथ मैं तेरे डोर है ,मानता नहीं,ये...

न वो अब घर रहा, न वो रहे ठिकाने ,तुझसे मिलने के भ...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ "एक दिन कभी यूँ भी होगा ...