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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न ": तेरी बरूखी ने एहसान कर दिया,मेरा वक़्त मेरे ही ना...
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सता ले अभी,यूँ हाथ मैं तेरे डोर है ,मानता नहीं,ये...
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न वो अब घर रहा, न वो रहे ठिकाने ,तुझसे मिलने के भ...
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ "एक दिन कभी यूँ भी होगा ...
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