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"गुप्त रत्न ": अपने ही ख्वाबों को टूटता देखा ,वक़्त को हाथों से ...

"गुप्त रत्न ": तेरी बरूखी ने एहसान कर दिया,मेरा वक़्त  मेरे ही ना...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सता ले अभी,यूँ हाथ मैं तेरे डोर है ,मानता नहीं,ये...