यह ब्लॉग खोजें
गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
संदेश
जून, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आपके लिए गुप्तरत्न मंज़ूर कर भी लूँ तेरे पास आना,पर तुमको भी होगा ये बाताना/
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
आपके लिए "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "बेसब्र होकर...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न ": रमजान मुबारक विशेष ........... "गुप्त रत्न"जिंदगी ...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"गुप्त रत्न ": "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "क्यों लड़ रह...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
आपके लिए ": "गुप्त रत्न "" भावनाओं के समंदर मैं "बेसब्र होकर...
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

