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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : अचानक पन्ने  पलटे  ,की कुछ ख्याल आ गयाकितने आगे आ...

ग़ज़ल "गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ :                      हौसला खुद तुझे पुकारेगी मंज़...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : चलो सुनो शब्दो की महिमातुम आज ,जाने कितने इन शब्...

"गुप्त रत्नजख्म  भी तुमने दिया ,मल...

"गुप्त रत्न "इतनी पिला मुझे की होश क...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...

"गुप्त रत्न" मुझे उन राहों पर अब फिर ...

इतनी पिला मुझे की होश कम भी न रहे ,........

मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...