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गुप्तरत्न "भावनाओं के समन्दर मैं" मेरे सजदों की बस इतनी हिफाज़त कर लेना ए मालिक, की तेरे दर से उठे न,और कही सर रत्न का झुके न ए मालिक । © hindi_poetry,poem based on feelings and emotion. हिंदी कविताओं का एक पेज,जिसमे भावनाओं में डूबे अल्फाज़ मिलेंगे ,कुछ दर्द तो कुछ मुहब्बत के पास मिलेंगे .© all the writing work is my own ©
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : अचानक पन्ने पलटे ,की कुछ ख्याल आ गयाकितने आगे आ...
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ग़ज़ल "गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : हौसला खुद तुझे पुकारेगी मंज़...
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : चलो सुनो शब्दो की महिमातुम आज ,जाने कितने इन शब्...
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"गुप्त रत्न "इतनी पिला मुझे की होश क...
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"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...
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"गुप्त रत्न" मुझे उन राहों पर अब फिर ...
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इतनी पिला मुझे की होश कम भी न रहे ,........
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मझधार मेरी ज़िन्दगी है ,अबकी किनारे अच्छे नहीं लगत...
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#BAL-DIWASतुम से है परेशान हम ,तुमसे ही प्यार भी
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