संदेश

मई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"गुप्त रत्न ": मेरा सब्र  जवाब अब दे रहां है ,गुज़ारिश है यू...

"गुप्त रत्न ": "गुप्त रत्न " " भावनाओं के समंदर मैं "जो बीती त...

बेमकसद सफ़र की न थकान दे //

"गुप्त रत्न ": अपने ही ख्वाबों को टूटता देखा ,वक़्त को हाथों से ...

"गुप्त रत्न ": तेरी बरूखी ने एहसान कर दिया,मेरा वक़्त  मेरे ही ना...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सता ले अभी,यूँ हाथ मैं तेरे डोर है ,मानता नहीं,ये...

न वो अब घर रहा, न वो रहे ठिकाने ,तुझसे मिलने के भ...

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ "एक दिन कभी यूँ भी होगा ...

आपके लिए पत्थर सा दिल, ये मोम बना, पिघल रहा है कतरा-कतरा।

"गुप्त रत्न "हिंदी कवितायेँ : सबसे मिलते - मिलते सीखा मैंने भी ,कभी खुदसे मिलना...

टूटे दिल की सी,आवाज़ लगीकोई तो  मीरा ही  कह गया ,...

हर शख्स हैरान परेशान सा है यहाँ पर ,किसको सुनाएँ ...